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Trump Tariff: भारत पर ट्रम्प टैरिफ क्या होगा असर, जानिए 6 बिन्दुओं में
Trump Tariff: आसान बिंदुओं में समझिए भारत में ट्रंप टैरिफ का क्या होगा असर?
Trump Tariff: अमेरिका ने भारत समेत दुनियाभे के देशों पर पर पारस्परिक टैरिफ लगा दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है इससे अमेरिका को जबर्दस्त फायदा होगा क्योंकि अब कोई देश सस्ते में या बिना टैक्स दिए अमेरिका में अपनी सामान नहीं भेज पायेगा। इस टैरिफ योजना का भारत पर क्या असर होगा ये जानना जरूरी है:
1.क्या है भारत पर लगा टैरिफ
डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा अन्य देशों के लिए घोषित 10 प्रतिशत से 49 प्रतिशत तक पारस्परिक टैरिफ में भारत को 26 फीसदी की दर में रखा गया है। यानी भारत द्वारा अमेरिका को निर्यात किए जा रहे सभी सामानों पर एक समान 26 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है। व्हाइट हाउस ने एक बयान में कहा है कि अमेरिका यात्री वाहन इम्पोर्ट पर 2.5 प्रतिशत शुल्क लगाता है, जबकि भारत 70 प्रतिशत शुल्क लगाता है। सेब को अमेरिका में शुल्क मुक्त प्रवेश की अनुमति है, लेकिन भारत अमेरिका से भारत आने वाले सेबों पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाता है, चावल पर अमेरिका में 2.7 प्रतिशत शुल्क लगता है, जबकि भारत में यह 80 प्रतिशत है। बयान में कहा गया है कि नेटवर्किंग स्विच और राउटर पर अमेरिका 0% टैरिफ लगाता है, लेकिन भारत 10-20 प्रतिशत अधिक दरें लगाता है। भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 46 बिलियन डॉलर है।
2.कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं
लगभग 14 बिलियन डॉलर मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट और 9 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के रत्न और आभूषण अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित होने वाले शीर्ष क्षेत्रों में से हैं। जबकि 26 प्रतिशत टैरिफ ऑटो पार्ट्स और एल्यूमीनियम उत्पादों पर लागू नहीं होगा, फिर भी वे ट्रंप द्वारा पहले घोषित 25 प्रतिशत टैरिफ को आकर्षित करेंगे। व्हाइट हाउस ने कहा है कि फार्मास्यूटिकल उत्पाद और ऊर्जा उत्पाद टैरिफ के नवीनतम दौर के तहत छूट प्राप्त हैं। ऑटोमोबाइल, रत्न और आभूषण, रसायन और फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए वाशिंगटन के पिछले क्षेत्र-व्यापी औसत टैरिफ क्रमशः 1.05 प्रतिशत, 2.12 प्रतिशत, 1.06 प्रतिशत और 0.41 प्रतिशत थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत से लगभग 9 बिलियन डॉलर का फार्मा निर्यात होता है। व्हाइट हाउस के बयान में कहा गया है कि भारत रसायन, दूरसंचार उत्पादों तथा चिकित्सा उपकरणों जैसे क्षेत्रों में अपनी ही शर्तें लागू करता है, जिससे अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत में अपने उत्पाद बेचना मुश्किल या महंगा हो जाता है। बयान में कहा गया है कि अगर इन बाधाओं को हटा दिया जाए, तो अनुमान है कि अमेरिकी निर्यात में कम से कम 5.3 बिलियन डॉलर प्रतिवर्ष की वृद्धि होगी।
3.रत्न और आभूषण सेक्टर पर बड़ा असर
रत्न और आभूषण क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होगा क्योंकि आयात शुल्क मौजूदा शून्य प्रतिशत से 20 प्रतिशत और सोने के आभूषणों पर 5.5-7 प्रतिशत तक हो सकता है, उद्योग के अधिकारियों ने कहा। अमेरिका भारत के सबसे बड़े आभूषण निर्यात बाजारों में से एक है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत है। अमेरिका को भारतीय आभूषण निर्यात प्रति वर्ष 11 बिलियन डॉलर से अधिक है। भारत वर्तमान में अमेरिका से सोने, चांदी और प्लैटिनम के आभूषणों पर 20 प्रतिशत आयात शुल्क लगाता है।
4.अन्य एशियाई देशों पर कितना टैरिफ?
अमेरिका ने चीन पर 34 प्रतिशत पारस्परिक कर लगाया है, जापान के अमेरिका को निर्यात पर 24 प्रतिशत, थाईलैंड पर 36 प्रतिशत, बांग्लादेश पर 37 प्रतिशत, मलेशिया पर 24 प्रतिशत, ताइवान पर 32 प्रतिशत, दक्षिण कोरिया पर 25 प्रतिशत तथा वियतनाम पर 46 प्रतिशत कर लगेगा, जो सबसे अधिक है।
5.भारत को फायदा
ट्रम्प द्वारा चीन पर अधिक टैरिफ लगाए जाने के साथ, भारत जिन क्षेत्रों में अमेरिका के बाजार में हिस्सेदारी हासिल कर सकता है, उनमें कपड़ा, परिधान और जूते शामिल हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत को लोहा और इस्पात उत्पादों के निर्यात को बढ़ाने में भी अवसर दिखाई देता है।
भारत का फार्मास्युटिकल क्षेत्र नई व्यवस्था में फायदा उठा सकता है क्योंकि इस सेक्टर पर अस्थायी रूप से नए टैक्स नहीं लगाये गए हैं। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत वर्तमान में अमेरिकी फार्मा आयात पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाता है, जबकि अमेरिका भारतीय फार्मा उत्पादों पर कोई शुल्क नहीं लगाता है।
इसके अलावा भारत के कपड़ा उद्योग को फायदा होगा क्योंकि वियतनाम, बांग्लादेश और चीन जैसे उसके प्रतिस्पर्धियों को उच्च टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। यह और भी फायदेमंद हो सकता है अगर भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता कपास के आयात पर जीरो टैक्स पर तय होती है।
6.भारत के लिए आगे का रास्ता
फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने शीघ्र व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने तथा शुल्कों पर अपने गतिरोध को हल करने की दिशा में बातचीत शुरू करने पर सहमति व्यक्त की थी। समझा जाता है कि भारत 23 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य के अमेरिकी सामानों पर टैरिफ में कटौती करने के लिए तैयार है। अभी भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता जारी है और इसमें महत्वपूर्ण निर्णय निकल कर आने की उम्मीद है।