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Martand Sun Temple: ये है मार्तंड सूर्य मंदिर-एक अनोखा सूर्य मंदिर, जानिए इसके इतिहास से जुड़े इन रहस्यों के बारे में
Martand Sun Temple History: क्या आप जानते हैं कि 8वीं सदी में कारकोटा राजवंश के राजा ललितादित्य ने जम्मू-कश्मीर में अनंतनाग ज़िले के मट्टन इलाके के पास एक पहाड़ी पर मार्तंड सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया था।
Martand Sun Temple History (Image Credit-Social Media)
Martand Sun Temple History: भारत देश के पांच राज्यों आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, गुजरात, राजस्थान और कश्मीर में प्रसिद्ध सूर्य मंदिर हैं। ये प्रमुख मंदिर हैं: आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम का अरसावल्ली सूर्य मंदिर , उड़ीसा का कोणार्क सूर्य मंदिर, गुजरात के मेहसाणा में मोढेरा सूर्य मंदिर, राजस्थान के झालरापाटन का सूर्य मंदिर और कश्मीर का मार्तंड सूर्य मंदिर। आंध्र प्रदेश, उड़ीसा , गुजरात और राजस्थान के सूर्य मंदिर सैलानियों के बीच घूमने और देखने लायक जगहों में से है और कुछ मंदिरों में पूजा भी की जाती है। लेकिन कश्मीर का मार्तंड सूर्य मंदिर अब सिर्फ अवशेष मात्र बचा है। दअरसल सूर्य को संस्कृत में मार्तंड नाम से जाना जाता है। इस मार्तंड सूर्य मंदिर को कश्मीर में पांडौ लैदान के नाम से भी पुकारा जाता है। इस मार्तंड सूर्य मंदिर को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान द्वारा संरक्षित स्मारकों की सूची में शामिल किया गया है।
8वीं सदी में कारकोटा राजवंश के राजा ललितादित्य ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। यह मंदिर जम्मू-कश्मीर में अनंतनाग ज़िले के मट्टन इलाके के पास एक पहाड़ी पर स्थित है। समुद्री तल से लगभग 5,400 फीट की ऊंचाई पर यह मार्तंड मंदिर अनंतनाग से करीब 8 किमी और पहलगाम से करीब 35 किमी की दूरी पर स्थित है। गंधार, गुप्त और चीनी वास्तुकला शैली के आधार पर बने इस मंदिर में एक नियमित दूरी पर 84 स्तंभ हैं। राजसी वास्तुकला का एहसास देने वाले इस मंदिर को बनाने में उस जमाने के कारीगरों द्वारा चूने के पत्थर की चौकोर ईंटों का इस्तेमाल किया गया है।
Martand Sun Temple (Image Credit-Social Media)
सूर्य देव में आस्था रखने वाले लोगों के इस समृद्ध मंदिर पर 15वीं सदी में मुगल काल के दौरान कई बार आक्रमण कर ध्वस्त करने की कोशिश की गई जिसके परिणामस्वरूप अब यह अपने जीर्ण अवस्था में है। कश्मीर के पहाड़ों के बीच बर्फ से ढके इस मंदिर से खूबसूरत घाटी का नज़ारा देखते ही बनता है। भगवान विष्णु और सूर्य को समर्पित इस मंदिर में तीन अलग-अलग कक्ष हैं- मंडप, गर्भगृह और अंतराल।
सुबह सूर्योदय से सूर्य की पहली किरण के साथ इस मंदिर में भगवान सूर्य की पूजा शुरू हो जाती है। इस मंदिर में एक तालाब है जिसमें पर्यटक कई रंग-बिरंगी मछलियां देख सकते हैं।
Martand Sun Temple (Image Credit-Social Media)
करीब 32 हजार वर्ग फीट के क्षेत्र में फैले हुए इस आकर्षक मार्तंड सूर्य मंदिर के मुख्य द्वार पर भगवान विष्णु, गंगा और यमुना देवी और सूर्यदेव के चित्रों की नक्काशी के अलावा, संस्कृत शिलालेख, क्षरित मूर्तियां, पारंपरिक संगीत कार्यक्रमों और नृत्य मुद्राओं की आकृतियों को देख सकते हैं। इस मंदिर के मुख्य परिसर के चारों तरफ करीब 83 छोटे मंदिर एक परिधि में पंक्तिबद्ध तरीके से चूना पत्थर के स्तंभों से जुड़े नज़र आएंगे। कश्मीर घाटी में यह मंदिर हिंदू धर्म की आस्था का प्रतीक है।
कैसे पहुंचें ?
हवाई मार्ग से यहां पहुंचने के लिए निकटतम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा श्रीनगर का शेखुल हवाई अड्डा है। यह हवाई अड्डा देश के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यहां से अनंतनाग करीब 62 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पहलगाम से भी मंदिर टैक्सी या बस द्वारा पहुंचा जा सकता है। मंदिर जाने के रास्ते में पर्यटक प्राकृतिक सुंदर दृश्यों का नज़ारा भी देख सकते हैं।
Martand Sun Temple (Image Credit-Social Media)
रेल मार्ग से यहां पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन जम्मू तवी है जो शहर से 210 किलोमीटर दूर है । यह रेलवे स्टेशन भारत के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। अनंतनाग तक पहुंचने के लिए बारामुल्ला, बडगाम, श्रीनगर और बनिहाल से स्थानीय रेल सेवा भी उपलब्ध है।
सड़क मार्ग से अनंतनाग जम्मू कश्मीर के राष्ट्रीय राजमार्ग एन एच 44 से पहुंच सकते हैं। जम्मू और कश्मीर के प्रमुख शहरों से यह जगह बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
कब घूमने जाएं ?
जम्मू कश्मीर में मौसम की स्थिति देखकर यहां आने का प्लान कर सकते हैं। इस मंदिर को देखने जाने के लिए सबसे अच्छा समय अप्रैल से अक्टूबर तक का है। गर्मियों के मौसम में जहां अधिकतर लोग ठंड का एहसास करना चाहते हैं, कश्मीर घूमने का प्लान बनाकर इस मंदिर को देखने का अवसर प्राप्त कर सकते हैं।