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Mughal Ke Vanshaj: ये हैं मुग़लों के वंशज, जानिए हर महीने कितनी मिलती है इनको पेंशन

Mughal Ke Vanshaj Kaun Hai: आज हम आपको मुग़लों के वंशज के बारे में बताने जा रहे हैं वो इस समय किस हालत में हैं और कहाँ रह रहे हैं साथ ही आइये जानते हैं कि सरकार उन्हें कितनी पेंशन दे रही है।

Shweta Srivastava
Published on: 2 April 2025 1:41 PM IST
Mughal Ke Vanshaj Kaun Hai 
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Mughal Ke Vanshaj Kaun Hai (Image Credit-Social Media)

Mughal Ke Vanshaj Kaun Hai: क्या आप जानते हैं कि मुगलों के वंशजों को हर महीने सरकार की तरफ से कितनी पेंशन दी जा रही है ? आइये आज हम आपको बताते हैं कि मुगलों के वंशज यानी मुगल शासक बहादुर शाह ज़फर के परपोते की पत्नी को सरकार कितनी पेंशन हर महीने दे रही है।

मुग़लों के वंशजों को हर महीने कितनी पेंशन मिलती है

अंतिम मुगल शासक बहादुर शाह ज़फर के परपोते की पत्नी सुल्ताना बेगम खुद को अंतिम मुगल शासक बहादुर शाह ज़फर के परपोते की पत्नी बतातीं हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वो इस समय कहां है? और किस हालत में अपना जीवनयापन कर रहीं हैं? लेकिन आज हम आपको यह भी बताएंगें कि सरकार की तरफ से उन्हें हर महीने पेंशन भी दी जा रही है। लेकिन कितनी है इस पेंशन की राशि और कब से उन्हें यह पेंशन दी जा रही है आइये जानते हैं।

बहादुर शाह ज़फर मुगलों के अंतिम शासक थे और उनके परपोते की पत्नी सुल्ताना बेगम इस समय कोलकाता के हावड़ा में रहती हैं। वह खुद को अंतिम मुगल शासक बहादुर शाह ज़फर के परपोते की पत्नी बताती है। उन्होंने बताया कि उनकी पैदाइश लखनऊ में हुई थी और परवरिश कोलकाता में हुई उन्होंने यह भी कहा कि उनके नाना उन्हें कोलकाता लेकर आए थे।

इसके आगे सुल्ताना कहतीं हैं कि उनके पति प्रिंस मोहम्मद मिर्जा बेदार बख्त थे जिन्हें मुगल शासक बहादुर शाह ज़फर के परपोते कहा जाता है। कोलकाता में ही सुल्ताना का निकाह अंतिम मुगल शासक बहादुर शाह ज़फर के परपोते से हुआ था। सुल्ताना ने यह भी बताया कि जवाहरलाल नेहरू को जब उनके बारे में पता चला तो उन्होंने 1960 में बहादुर शाह जफर के परपोते के लिए ढाई सौ रुपए पेंशन को तय किया था।

वही मिर्जा मोहम्मद बेदार बख्त का जन्म साल 1920 में रंगून में हुआ था। मुगलों के वंशज होने के नाते अंग्रेजों ने उन्हें घर भी दिया था साथ ही साथ नौकर चाकर भी उनके पास थे। लेकिन साथ ही साथ उनको यह हिदायत भी थी कि वह रंगून से बाहर न जाए। ऐसा भी कहा जाता है कि बेदार बख्त को फूल की टोकरी में छुपाकर भारत लाया गया था। मुगलों के वंशज होने के नाते उन्हें घुड़सवारी आती थी उन्हें कुश्ती और बॉक्सिंग भी सिखाई गई थी।

वहीँ सुल्ताना बेगम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एक बार राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल उनसे मिलने आईं थीं जिन्होंने उन्हें राष्ट्रपति से मिलवाया उन्होंने आवेदन तैयार किया और उसमें 10000 रुपए पेंशन देने की मांग भी की गई थी। लेकिन फिलहाल सुल्ताना बेगम को इस समय ₹6000 पेंशन मिल रही है।

सुल्ताना बेगम का कहना है कि इतने पैसे में उनका गुज़ारा बड़ी मुश्किल से होता है। 6000 रूपए में से ढाई हजार वह घर का किराया दे देतीं हैं और बाकी बचे हुए पैसे में बड़ी मुश्किल से उनका गुजारा होता है। वो बुक बाइंडिंग, चूड़ियां बनाने और धागे का काम अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए करतीं हैं।

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