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Sonbhadra News: दुर्दांत नक्सली मुन्ना और अजीत को उम्रकैद, 10 लाख के इनामी रह चुके मुन्ना का पांच राज्यों में था खौफ

Sonbhadra News: अधिवक्ताओं की ओर से पेश की गई दलीलों, पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों की तरफ से परीक्षित कराए गए बयानों के आधार पर दोषसिद्ध पाया गया और दोषी पाए गए मुन्ना विश्वकर्मा व अजीत कोल को आजीवन कारावास के साथ ही 20-20 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

Kaushlendra Pandey
Published on: 3 April 2025 9:14 PM IST
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दुर्दांत नक्सली मुन्ना और अजीत को उम्रकैद, 10 लाख के इनामी रह चुके मुन्ना का पांच राज्यों में था खौफ (Photo- Social Media)

Sonbhadra News: यूपी के साथ ही, पांच राज्यों में वर्षों तक खौफ का पर्याय रह चुके दुर्दांत नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा और उसके साथ अजीत कोल को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। 15 वर्ष पूर्व मुखबिरी के शक में अपने ही कथित साथी की हत्या करने के मामले की वृहस्पतिवार को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम जीतेंद्र कुमार द्विवेदी की अदालत में सुनवाई की गई। अधिवक्ताओं की ओर से पेश की गई दलीलों, पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों की तरफ से परीक्षित कराए गए बयानों के आधार पर दोषसिद्ध पाया गया और दोषी पाए गए मुन्ना विश्वकर्मा व अजीत कोल को आजीवन कारावास के साथ ही 20-20 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड अदा न करने की दशा में चार-चार माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई गई है। जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।

वर्ष 2009 में चननी में किया गया था कत्ल

बताते चलें कि वर्ष 2009 में जनअदालत लगाकर पुलिस मुखबिरी के शक में कोन थाना क्षेत्र के चननी में एक व्यक्ति की हत्या का मामला सामने आया था। दावा किया गया था कि मुन्ना विश्वकर्मा ने जन अदालत लगाकर रामवृक्ष नामक व्यक्ति की हत्या कर दी थी। चर्चाओं में दावा किया गया कि रामवृक्ष का भी जुड़ाव पहले कथत नक्सली संगठन से रहा है। इस मामले में अजय कुमार पासवान पुत्र सरजू पासवान निवासी बरहमोरी, थाना कोन की तरफ से गत तीन दिसंबर 2009 को पुलिस को एक तहरीर सौंपी गई थी। इसके जरिए अवगत कराया गया था कि 1/2 दिसंबर 2009 की रात करीब 3 बजे भीतरी जंगल मंे नक्सलियों के दो गुटों के बीच लेवी वसूली और रुपये के बंटवारे को लेकर फायरिंग हुई है, जिसमें एक नक्सली के मारे जाने की जानकारी मिली है। बताई गई जगह पर पुलिस पहुंची तो वहां रामवृक्ष निवासी चननी का शव बरामद किया गया।

पुलिस विवेचना में सामने आया था दोनों नक्सलियों का नाम

पुलिस की विवेचना के दौरान नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा उर्फ विद्रोही, उर्फ रामवृक्ष पुत्र तिलकधारी निवासी समाबांध, कम्हारडीह, थाना राबर्ट्सगंज और अजीत कोल उर्फ बब्बल पुत्र बहादुर कोल निवासी सनाइत, थाना नौगढ़, जिला चंदौली का नाम प्रकाश में आया। विवेचक ने पर्याप्त सबूत मिलने का दावा करते हुए न्यायालय में चार्जशीट पेश की। सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों, उपलब्ध कराए साक्ष्यों और पेश की गई दलीलों को दृष्टिगत रखते हुए दोनों को दोषी पाया गया। हत्या के अपराध के लिए दोनों को उम्रकैद और 20- 20 हजार अर्थदंड की सजा सुनाइ गई। अभियोजन पक्ष की तरफ से मामले की पैरवी अपर जिला शासकीय अधिवक्ता विनोद कुमार पाठक द्वारा की गई।

ऑपरेशन चक्रव्यूह के जरिए दोनों वर्ष 2012 में हुए थे गिरफ्तार

मुन्ना और उनके साथियों के आतंक को देखते हुए, जिले के तत्कालीन एसपी सुभाषंचंद्र दूबे (वर्तमान में आईजी ट्रैफिक एंड रोड सेफ्टी) ने वर्ष 2021 में ऑपरेशन चक्रव्यू हके जरिए मुन्ना और उसके सार्थियों को दबोचने में कामयाबी पाई थी। यह कामयाबी इतनी बड़ी थी कि सीआरपीएफ के डीजी की तरफ से उन्हें कमेंडेशन डिस्क के अवार्ड से नवाजा गया था। जिस समय मुन्ना की गिरफ्तारी हुई थी। उस समय उस पर यूपी, एमपी, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ से कुल 10 लाख का इनाम था। यूपी की तरफ से उस पर तीन लाख और अजीत पर 50 हजार का इनाम घोषित था। उसी समय से दोनों जेल में है। मुन्ना को, दो मामलों में पूर्व में आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। यह तीसरा प्रकरण है, जिसमें उम्रकैद की सजा हुई है।

Shashi kant gautam

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